शिमला को मिलेगा नया रूप: नगर निगम की अनोखी पहल से बढ़ेगी सफाई व्यवस्था

शिमला
हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत 'पहाड़ों की रानी' शिमला को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब शिमला आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अपने वाहनों का कचरा सड़क पर फेंकने के बजाय नगर निगम को देना होगा। यह नई व्यवस्था जल्द ही लागू होने वाली है, जिसका उद्देश्य शिमला के पर्यावरण को बेहतर बनाना है।

कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?
इस योजना के तहत, शिमला के प्रवेश द्वार पर ही नगर निगम के कर्मचारी पर्यटक वाहनों से कचरा इकट्ठा करेंगे। यह कचरा विशेष रूप से भरयाल कूड़ा संयंत्र में भेजा जाएगा। इस सेवा के लिए वाहन चालकों से एक न्यूनतम कूड़ा शुल्क भी लिया जाएगा। नगर निगम ने इस शुल्क की राशि पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया है कि यह राशि कम होगी और इसे लागू करने से पहले सदन की मंजूरी ली जाएगी।

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क्यों उठाया गया यह कदम?
शिमला में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, और खासकर गर्मी और सर्दियों के मौसम में पर्यटकों की संख्या बहुत बढ़ जाती है। नगर निगम के अनुसार, भले ही हर घर से कूड़ा उठाया जाता है, फिर भी शहर की सड़कों, हाईवे और पार्किंग में कचरे के ढेर लगे रहते हैं। इसका मुख्य कारण पर्यटक वाहनों से फेंका जाने वाला कचरा है। पर्यटक बसें, टैक्सी और ट्रैवलर जैसी गाड़ियां अक्सर पार्किंग में या सड़क किनारे कचरा फेंक देती हैं, जिससे शिमला की सुंदरता और स्वच्छता पर बुरा असर पड़ता है।

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टैक्सी चालकों के लिए भी नियम
नगर निगम ने टैक्सी चालकों के लिए भी खास नियम बनाए हैं। उन्हें अपनी गाड़ियों में डस्टबीन रखना होगा और उस कचरे को शहर के निर्धारित कूड़ा एकत्रीकरण केंद्रों पर खाली करना होगा। फिलहाल टूटीकंडी पार्किंग के पास एक नया कूड़ा एकत्रीकरण केंद्र बनाने की तैयारी है, जबकि आईएसबीटी टूटीकंडी में भी कचरा इकट्ठा किया जा रहा है।

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नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने बताया कि यह प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और पर्यटक वाहनों का ब्योरा भी इकट्ठा किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने सभी व्यावसायिक वाहनों में कूड़ेदान लगाना अनिवार्य किया था, लेकिन अभी तक इस कचरे को सही जगह पर डालने की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी, जिसे नगर निगम अब ठीक करने की कोशिश कर रहा है। इस नई पहल से न केवल शिमला की स्वच्छता बढ़ेगी, बल्कि यह पर्यटकों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में मदद करेगी।

 

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